श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  10.51.60 
युञ्जानानामभक्तानां प्राणायामादिभिर्मन: ।
अक्षीणवासनं राजन् द‍ृश्यते पुनरुत्थितम् ॥ ६० ॥
 
 
अनुवाद
प्राणायाम जैसे अभ्यासों में लगे ऐसे अभक्तजनों के मन कभी सांसारिक इच्छाओं से पूरी तरह से शुद्ध नहीं होते। इस तरह हे राजन्, उनके मन में सांसारिक इच्छाओं का फिर से उभरना देखा गया है।
 
The minds of such non-devotees who engage in practices like prāṇāyāma are never purified of material desires. Thus, O King, material desires are seen to arise again in their minds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)