श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  10.51.59 
प्रलोभितो वरैर्यत्त्वमप्रमादाय विद्धि तत् ।
न धीरेकान्तभक्तानामाशीर्भिर्भिद्यते क्व‍‍चित् ॥ ५९ ॥
 
 
अनुवाद
यह जान लो कि मैंने तुम्हें वरदान देकर ये सिद्ध करने के लिए बहकाया था कि तुम धोखे में नहीं आ सकते। मेरे शुद्ध भक्तों की बुद्धि कभी भी सांसारिक आशीर्वाद से डगमगाती नहीं है।
 
Know that I was tempting you with benedictions to prove that you cannot be deceived. The intelligence of My pure devotee is never beguiled by material blessings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)