श्रीभगवानुवाच
सार्वभौम महाराज मतिस्ते विमलोर्जिता ।
वरै: प्रलोभितस्यापि न कामैर्विहता यत: ॥ ५८ ॥
अनुवाद
भगवान ने कहा: हे सम्राट, महान शासक, तुम्हारा मन शुद्ध एवं समर्थ है। यद्यपि मैंने तुम्हें वरदानों के साथ लुभाने का प्रयास किया, परन्तु तुम्हारा मन भौतिक इच्छाओं के अधीन नहीं हुआ।
The Lord said: O Emperor, great King, your mind is pure and powerful. Although I tried to entice you with benedictions, your mind was not overcome by material desires.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥