हे सर्वशक्तिशाली, मैं तुम्हारे चरणकमलों की सेवा के सिवाय किसी भी अन्य वर की इच्छा नहीं करता, क्योंकि यह वर उन लोगों द्वारा उत्सुकतापूर्वक चाहा जाता है जो भौतिक इच्छाओं से मुक्त हैं। हे हरि! ऐसा कौन प्रबुद्ध व्यक्ति होगा जो मुक्तिदाता अर्थात् आपकी पूजा करते हुए ऐसा वर चुनेगा जो उसका ही बंधन बने?
O Almighty, I desire no boon other than service to Your feet, for this is the boon most eagerly sought by those who are free from material desires. O Hari, who is the enlightened person who, while worshiping You, the Liberator, will choose a boon which will become his bondage?
तात्पर्य
भगवान ने मुचकुंद को इच्छानुसार वरदान देने को कहा पर मुचकुंद को केवल भगवान ही चाहिए थे। यही शुद्ध कृष्ण भावना है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥