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bhagavat 10.51.39-40: तब भी हे मित्र, वर्तमान जन्म, नाम और कर्म के बारे में मैं तुम्हें बताता हूँ। कृपया सुनो। कुछ काल पहले ब्रह्मा ने मुझसे धर्म की रक्षा करने और धरती के भारस्वरूप असुरों का विनाश करने का आग्रह किया था। इस तरह मैंने यदु वंश में आनकदुन्दुभि के घर अवतार लिया। क्योंकि मैं वसुदेव का पुत्र हूँ, लोग मुझे वासुदेव कहते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.51: मुचुकुन्द का उद्धार   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  10.51.39-40 
तथाप्यद्यतनान्यङ्ग श‍ृणुष्व गदतो मम ।
विज्ञापितो विरिञ्चेन पुराहं धर्मगुप्तये ।
भूमेर्भारायमाणानामसुराणां क्षयाय च ॥ ३९ ॥
अवतीर्णो यदुकुले गृह आनकदुन्दुभे: ।
वदन्ति वासुदेवेति वसुदेवसुतं हि माम् ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
तब भी हे मित्र, वर्तमान जन्म, नाम और कर्म के बारे में मैं तुम्हें बताता हूँ। कृपया सुनो। कुछ काल पहले ब्रह्मा ने मुझसे धर्म की रक्षा करने और धरती के भारस्वरूप असुरों का विनाश करने का आग्रह किया था। इस तरह मैंने यदु वंश में आनकदुन्दुभि के घर अवतार लिया। क्योंकि मैं वसुदेव का पुत्र हूँ, लोग मुझे वासुदेव कहते हैं।
 
Nevertheless, O friend, I shall tell you about my (present) birth, name and deeds. Please listen. Some time ago, Brahma requested me to protect Dharma and kill the demons who were a burden on the earth. Thus, I took birth in the Yadu dynasty in the house of Anakadundubhi. Since I am the son of Vasudeva, people call me Vasudeva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)