श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.51.27 
श्रीमुचुकुन्द उवाच
को भवानिह सम्प्राप्तो विपिने गिरिगह्वरे ।
पद्‍भ्यां पद्मपलाशाभ्यां विचरस्युरुकण्टके ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
श्री मुचुकुन्द ने कहा, "आप कौन हैं, जो जंगल में इस पर्वत-गुफ़ा में आए हैं? वो भी कमल की पंखुड़ियों जैसे कोमल पैरों से जो काँटेदार जमीन पर चले?"
 
Sri Muchukunda said, “Who are You, who have come to this mountain-cave in the forest, walking over the thorny ground with Your feet as soft as lotus petals?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)