श्रीमुचुकुन्द उवाच
को भवानिह सम्प्राप्तो विपिने गिरिगह्वरे ।
पद्भ्यां पद्मपलाशाभ्यां विचरस्युरुकण्टके ॥ २७ ॥
अनुवाद
श्री मुचुकुन्द ने कहा, "आप कौन हैं, जो जंगल में इस पर्वत-गुफ़ा में आए हैं? वो भी कमल की पंखुड़ियों जैसे कोमल पैरों से जो काँटेदार जमीन पर चले?"
Sri Muchukunda said, “Who are You, who have come to this mountain-cave in the forest, walking over the thorny ground with Your feet as soft as lotus petals?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)