Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.51.20: "मंगल हो तुम्हारा! अब तुम हमसे कोई भी वरदान मांग सकते हो, लेकिन मुक्ति के सिवाय, क्योंकि मुक्ति तो सिर्फ एकमात्र अक्षय भगवान विष्णु ही प्रदान कर सकते हैं।" | bhagavat अध्याय 10.51: मुचुकुन्द का उद्धार । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वरं वृणीष्व भद्रं ते ऋते कैवल्यमद्य न: ।
एक एवेश्वरस्तस्य भगवान् विष्णुरव्यय: ॥ २० ॥
अनुवाद
"मंगल हो तुम्हारा! अब तुम हमसे कोई भी वरदान मांग सकते हो, लेकिन मुक्ति के सिवाय, क्योंकि मुक्ति तो सिर्फ एकमात्र अक्षय भगवान विष्णु ही प्रदान कर सकते हैं।"
“May you be blessed. Now you can choose any boon except salvation, which can only be granted by the indestructible Lord Vishnu.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥