वरं वृणीष्व भद्रं ते ऋते कैवल्यमद्य न: ।
एक एवेश्वरस्तस्य भगवान् विष्णुरव्यय: ॥ २० ॥
अनुवाद
"मंगल हो तुम्हारा! अब तुम हमसे कोई भी वरदान मांग सकते हो, लेकिन मुक्ति के सिवाय, क्योंकि मुक्ति तो सिर्फ एकमात्र अक्षय भगवान विष्णु ही प्रदान कर सकते हैं।"
“May you be blessed. Now you can choose any boon except salvation, which can only be granted by the indestructible Lord Vishnu.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥