श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.51.17 
नरलोकं परित्यज्य राज्यं निहतकण्टकम् ।
अस्मान् पालयतो वीर कामास्ते सर्व उज्झिता: ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
“हे वीरवर, नर-जगत् में अपने निर्विघ्न राज्य को त्यागकर आपने हम सबकी रक्षा के लिए अपनी इच्छाओं का त्याग कर दिया।”
 
“O brave man, you left your unobstructed kingdom in the human world and protected us without caring about your personal desires.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)