श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.51.16 
लब्ध्वा गुहं ते स्व:पालं मुचुकुन्दमथाब्रुवन् ।
राजन् विरमतां कृच्छ्राद् भवान् न: परिपालनात् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं को कार्तिकेय जी अपने सेनापति के रूप में मिल गए तब उन्होंने मुचुकुन्द राजा से कहा कि "हे राजा! अब आप हमारी रक्षा का कठिन और परेशानी वाला कार्य छोड़ सकते हैं।"
 
When the gods got Kartikeya as their commander, they said to Muchukunda, “O king, now you can give up the troublesome task of protecting us.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)