श्रीशुक उवाच
स इक्ष्वाकुकुले जातो मान्धातृतनयो महान् ।
मुचुकुन्द इति ख्यातो ब्रह्मण्य: सत्यसङ्गर: ॥ १४ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इक्ष्वाकु राजवंश में मान्धाता के पुत्र के रूप में जन्मे महापुरुष का नाम मुचुकुन्द था। वह ब्राह्माणी संस्कृति का पालन करने वाला तथा युद्ध में अपने व्रत का दृढ़ अनुयायी था।
Sukadeva Goswami said: The name of that great man was Muchukunda and he was born as the son of Mandhata in the Ikshvaku dynasty. He was a worshipper of Brahmin culture and was firm in his vows in war.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥