सुषुप्तान् मथुरायां तु
पौरान् तत्र जनार्दनः
उद्धृत्य सहसा रात्रौ
द्वारकायां न्यवेदयत्
प्रबुद्धाः ते जनाः सर्वे
पुत्र-दार-समन्विताः
हैम-हर्म्य-तले विष्टा
विस्मयं परमं ययुः
“मथुरा के नागरिकों के सोने पर, भगवान जनार्दन ने अचानक उन्हें उस नगर से उठाकर द्वारका में बसा दिया। सभी पुरुषों को जागने पर यह देखकर महान आश्चर्य हुआ कि वे अपने परिवार के साथ स्वर्ण-महलों में विराजमान हैं।”
