तदनंतर भगवान कृष्ण ने यदुराज को वह सारा धन भेंट किया जो युद्ध के मैदान में गिरा था—अर्थात् मृत योद्धाओं के अनगिनत आभूषण।
Thereafter, Lord Krishna presented to Yaduraj all the wealth that had fallen on the battlefield, in the form of innumerable ornaments of the dead warriors.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि घोड़ों और अन्य पशुओं से भी आभूषण इकट्ठा किए गए थे। जो लोग भावुक हैं, उनके लिए यहां यह भी कहा जा सकता है कि जरासंध मथुरा उस निश्चित उद्देश्य से आया था कि वह कृष्ण और बलराम सहित शहर के सभी लोगों की हत्या कर देगा। यह भगवान की अकारण दया ही है कि वह जीवों को उनके अपने कर्मों का फल देता है और इस तरह उन्हें प्रकृति के नियमों और एक सर्वोच्च भगवान के अस्तित्व के प्रति अधिक संवेदनशील बनने में मदद करता है। अंततः, कृष्ण ने जरासंध और युद्ध के मैदान में मारे गए अन्य लोगों को आध्यात्मिक मुक्ति प्रदान की। भगवान सख्त हैं, लेकिन वे दुर्भावनापूर्ण नहीं हैं। वास्तव में, वह दया के सागर हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥