श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.50.31 
बध्यमानं हतारातिं पाशैर्वारुणमानुषै: ।
वारयामास गोविन्दस्तेन कार्यचिकीर्षया ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
अनेक शत्रुओं का नाश करने वाले बलराम जब जरासंध को वरुण के दैवीय पाश से और अन्य सांसारिक रस्सियों से बाँधने लगे, तब गोविन्द ने उन्हें रुकने के लिए कहा क्योंकि अभी जरासंध के ज़रिए उन्हें एक कार्य करना था।
 
Balarama, the slayer of many enemies, began to bind Jarasandha with the divine noose of Varuna and other mundane ropes. But Govinda still had some work to do through Jarasandha, so he asked Balarama to stop.
तात्पर्य
हतारातिम शब्द का अर्थ है "जिसने अपने शत्रुओं को मारा है", या "जिसके द्वारा उसके शत्रु मारे जाएंगे।" श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने इस विचारपूर्ण टिप्पणी को प्रदान किया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)