Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.50.25-28: युद्ध के मैदान में, मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों के टुकड़े-टुकड़े होने से रक्त की सैकड़ों नदियाँ बह निकलीं। इन नदियों में हाथ साँपों की तरह, मनुष्यों के सिर कछुओं की तरह, मरे हुए हाथी द्वीपों की तरह और मरे हुए घोड़े मगरमच्छों की तरह प्रतीत हो रहे थे। उनके हाथ और जाँघें मछलियों की तरह, मनुष्यों के बाल नदियों की घास की तरह, बाण लहरों की तरह और विभिन्न हथियार झाड़ियों के झुरमुट की तरह लग रहे थे। रक्त की नदियाँ इन सभी वस्तुओं से भरी पड़ी थीं। रथ के पहिये भयानक भँवरों की तरह और बहुमूल्य मोती और आभूषण तेजी से बहती लाल नदियों में पत्थरों और रेत की तरह लग रहे थे, जो कायरों में भय और बुद्धिमानों में खुशी पैदा कर रहे थे। अपने हल के हथियार के प्रहारों से अत्यंत शक्तिशाली भगवान बलराम ने मगधेंद्र की सेना को नष्ट कर दिया। हालाँकि यह सेना एक अगम्य सागर की तरह गहरी और भयावह थी, लेकिन वसुदेव के दोनों पुत्रों के लिए, जो ब्रह्मांड के स्वामी हैं, यह युद्ध खेल से अधिक कुछ नहीं था। | bhagavat अध्याय 10.50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युद्ध के मैदान में, मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों के टुकड़े-टुकड़े होने से रक्त की सैकड़ों नदियाँ बह निकलीं। इन नदियों में हाथ साँपों की तरह, मनुष्यों के सिर कछुओं की तरह, मरे हुए हाथी द्वीपों की तरह और मरे हुए घोड़े मगरमच्छों की तरह प्रतीत हो रहे थे। उनके हाथ और जाँघें मछलियों की तरह, मनुष्यों के बाल नदियों की घास की तरह, बाण लहरों की तरह और विभिन्न हथियार झाड़ियों के झुरमुट की तरह लग रहे थे। रक्त की नदियाँ इन सभी वस्तुओं से भरी पड़ी थीं। रथ के पहिये भयानक भँवरों की तरह और बहुमूल्य मोती और आभूषण तेजी से बहती लाल नदियों में पत्थरों और रेत की तरह लग रहे थे, जो कायरों में भय और बुद्धिमानों में खुशी पैदा कर रहे थे। अपने हल के हथियार के प्रहारों से अत्यंत शक्तिशाली भगवान बलराम ने मगधेंद्र की सेना को नष्ट कर दिया। हालाँकि यह सेना एक अगम्य सागर की तरह गहरी और भयावह थी, लेकिन वसुदेव के दोनों पुत्रों के लिए, जो ब्रह्मांड के स्वामी हैं, यह युद्ध खेल से अधिक कुछ नहीं था।
Hundreds of rivers of blood flowed as men, elephants and horses were cut into pieces on the battlefield. In these rivers, arms looked like snakes, human heads like turtles, dead elephants like islands and dead horses like crocodiles. Their hands and thighs looked like fish, human hair like seaweed, arrows like waves and various weapons like groves of bushes. Rivers of blood were covered with all these things. The wheels of the chariot looked like frightening whirlpools and precious pearls and ornaments looked like stones and sand in the fast flowing red rivers, which caused fear in the cowards and joy in the wise. With the blows of his Halayudha, the extremely powerful Balarama destroyed the military strength of Magadhendra. Although this army was as vast and terrifying as an uncrossable ocean, for the two sons of Vasudeva, who are the lords of the universe, this war was no more than a joke.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥