श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.50.20 
श्रीशुक उवाच
जरासुतस्तावभिसृत्य माधवौ
महाबलौघेन बलीयसावृणोत् ।
ससैन्ययानध्वजवाजिसारथी
सूर्यानलौ वायुरिवाभ्ररेणुभि: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जैसे वायु सूर्य को बादलों से ढँक देती है या धूल से आग को छिपा लेती है, वैसे ही जरा के पुत्र ने मधु के दो वंशजों की ओर कूच किया और अपनी विशाल सेनाओं से उन्हें और उनके सैनिकों, रथों, पताकाओं, घोड़ों और सारथियों को घेर लिया।
 
Sukadeva Gosvami said: Just as the wind covers the sun with clouds, or the fire with dust, so the son of Jara advanced toward the two descendants of Madhu and surrounded them and their soldiers, chariots, banners, horses, and charioteers with his vast armies.
तात्पर्य
आचार्य श्रीधर का कहना है कि बादल केवल सूर्य को ढकते दिखाई देते हैं: सूर्य विस्तृत आकाश में चमकता रहता है। न ही धूल की एक पतली परत से आग की शक्ति प्रभावित होती है। इसी तरह, जरासंध की सैन्य शक्ति का "आच्छादन" केवल स्पष्ट था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)