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bhagavat 10.50.15: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने भाई को आमंत्रित किए जाने के बाद, दोनों दशार्ह, श्रीकृष्ण और बलराम, कवच पहनकर और अपने चमचमाते हथियारों का प्रदर्शन करते हुए अपने रथों पर चढ़कर नगरी से बाहर निकल पड़े। उनके साथ सेना का केवल एक बहुत ही छोटा दस्ता था।   |   bhagavat अध्याय 10.50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.50.15 
एवं सम्मन्‍त्र्य दाशार्हौ दंशितौ रथिनौ पुरात् ।
निर्जग्मतु: स्वायुधाढ्यौ बलेनाल्पीयसा वृतौ ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने भाई को आमंत्रित किए जाने के बाद, दोनों दशार्ह, श्रीकृष्ण और बलराम, कवच पहनकर और अपने चमचमाते हथियारों का प्रदर्शन करते हुए अपने रथों पर चढ़कर नगरी से बाहर निकल पड़े। उनके साथ सेना का केवल एक बहुत ही छोटा दस्ता था।
 
After Lord Krishna had thus invited His brother, both Dasharatha Krishna and Balarama mounted their chariots and went out of the city, wearing armor and displaying their glittering weapons. They were accompanied by only a small contingent of soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)