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bhagavat 10.50.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा जब कंस मार डाला गया, हे भरतवंशी, उनकी दो पत्नियाँ अस्ति और प्राप्ति अत्यंत दुखी होकर अपने पिता के घर चली गईं।   |   bhagavat अध्याय 10.50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.50.1 
श्रीशुक उवाच
अस्ति: प्राप्तिश्च कंसस्य महिष्यौ भरतर्षभ ।
मृते भर्तरि दु:खार्ते ईयतु: स्म पितुर्गृहान् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा जब कंस मार डाला गया, हे भरतवंशी, उनकी दो पत्नियाँ अस्ति और प्राप्ति अत्यंत दुखी होकर अपने पिता के घर चली गईं।
 
Sukadeva Goswami said: When Kamsa was killed, O Bharata's wife, his two chief queens, Asti and Prapti, went to their father's home, very saddened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)