श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 5: नन्द महाराज तथा वसुदेव की भेंट  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.5.7 
गावो वृषा वत्सतरा हरिद्रातैलरूषिता: ।
विचित्रधातुबर्हस्रग्वस्‍त्रकाञ्चनमालिन: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
गायों, बैलों और बछड़ों के पूरे शरीर पर हल्दी और तेल के साथ अलग-अलग तरह के खनिजों का मिश्रण लगाया गया था। उनके सर पे मोर पंख लगाए गए थे, उन्हें मालाएं पहनाई गई थीं और ऊपर से कपड़े तथा सोने के गहनों से ढंक दिया गया था।
 
The entire body of cows, bulls and calves was smeared with various kinds of minerals along with turmeric and oil. Their heads were decorated with peacock feathers, they were adorned with garlands and were covered with clothes and golden ornaments.
तात्पर्य
भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्-गीता (18.44) में निर्देश दिया है, कृषि-गो-रक्ष्य-वाणिज्यं वैश्य-कर्मा स्वाभावजं, जिसका अर्थ है, "कृषि, गोरक्षा तथा वाणिज्य, वैश्यों के स्वभाव-सम्मत कर्म हैं।" नंद महाराज वैश्य समुदाय के थे, जो किसान समुदाय है। इन श्लोकों में यह वर्णन किया गया है कि गायों की रक्षा कैसे करें और यह समुदाय कितना संपन्न था। हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि गायों, बैलों और बछड़ों की इतनी अच्छी देखभाल की जाती थी और उन्हें वस्त्रों और मूल्यवान स्वर्ण आभूषणों से इतनी अच्छी तरह से सजाया जाता था। वे कितने खुश थे। जैसा कि भागवतम में अन्य जगहों पर वर्णित किया गया है, महाराज युधिष्ठिर के समय में गायें इतनी खुश थीं कि वे चरागाहों को दूध से सराबोर कर देती थीं। यह भारतीय सभ्यता है। फिर भी उसी स्थान, भारत, भारतवर्ष में, वैदिक जीवन-शैली को त्यागने और भगवद्-गीता की शिक्षाओं को न समझने के कारण कितने लोग दुख भोग रहे हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)