Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.49.27: फिर भी, हे भद्र अक्रूर, मेरे हृदय के पुत्र−स्नेह से आकृष्ट होने के कारण आपके इन मोहक शब्दों का उस पर ठीक से असर नहीं पड़ता, जैसे मेघ में बिजली स्थिर नहीं रह पाती।   |   bhagavat अध्याय 10.49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.49.27 
तथापि सूनृता सौम्य हृदि न स्थीयते चले ।
पुत्रानुरागविषमे विद्युत् सौदामनी यथा ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
फिर भी, हे भद्र अक्रूर, मेरे हृदय के पुत्र−स्नेह से आकृष्ट होने के कारण आपके इन मोहक शब्दों का उस पर ठीक से असर नहीं पड़ता, जैसे मेघ में बिजली स्थिर नहीं रह पाती।
 
Nevertheless, O noble Akrura, because my fickle heart is biased by the affection for my sons, your charming words do not remain stable in my heart, just as lightning cannot remain stable in a cloud.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)