श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.49.24 
स्वयं किल्बिषमादाय तैस्त्यक्तो नार्थकोविद: ।
असिद्धार्थो विशत्यन्धं स्वधर्मविमुखस्तम: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
अपने तथाकथित आश्रितों द्वारा त्याग दिए जाने के बाद, जीवन के वास्तविक लक्ष्य से अनभिज्ञ, अपने वास्तविक कर्तव्य के प्रति उदासीन और अपने उद्देश्यों को पूरा करने में असफल रहने के कारण, वह मूर्ख आत्मा अपने पापों के परिणामों को अपने साथ लेकर नर्क के अंधकार में प्रवेश कर जाती है।
 
Abandoned by his so-called dependents, ignorant of the real goal of life, indifferent to his real duty and unsuccessful in fulfilling his objectives, that foolish person enters the darkness of hell carrying his sins with him.
तात्पर्य
यह बड़े दुख की विडम्बना है कि भौतिकवादी व्यक्ति, जो बीमा, सुरक्षा, संपत्ति और परिवार जमा करने में इतनी मेहनत करते हैं, वे पाप के दर्दनाक परिणामों के साथ नरक के अंधेरे में प्रवेश करते हैं। दूसरी ओर, जो लोग भगवान कृष्ण की चेतना और आध्यात्मिक जीवन को अपनाते हैं, जबकि वे जाहिर तौर पर संपत्ति, बड़े परिवार आदि को जमा करने की उपेक्षा करते हैं, तो वे अगले जन्म में कई आध्यात्मिक संपत्तियों से समृद्ध होकर प्रवेश करते हैं और इस प्रकार आत्मा के गहन सुखों का आनंद लेते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)