श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.49.18 
धर्मेण पालयन्नुर्वीं प्रजा: शीलेन रञ्जयन् ।
वर्तमान: सम: स्वेषु श्रेय: कीर्तिमवाप्स्यसि ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
सारे रिश्तेदारों के साथ समानता का व्यवहार करते हुए, अपनी प्रजा को अपने अच्छे आचरण से खुश रखते हुए, और धर्मपूर्वक पृथ्वी की रक्षा करते हुए आप निश्चित रूप से सफलता और यश प्राप्त करेंगे।
 
By protecting the earth righteously, keeping your subjects happy with your good character and treating all your relatives equally, you will certainly achieve success and fame.
तात्पर्य
अक्रूर ने धृतराष्ट्र से कहा कि भले ही उन्होंने सिंहासन हड़प लिया है, लेकिन अगर वे अब धर्म के सिद्धांतों के अनुसार शासन करते हैं और उचित व्यवहार करते हैं, तो वे सफल हो सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)