समदु:खसुखोऽक्रूरो विदुरश्च महायशा: ।
सान्त्वयामासतु: कुन्तीं तत्पुत्रोत्पत्तिहेतुभि: ॥ १५ ॥
अनुवाद
महारानी कुन्ती के साथ ख़ुशियाँ और गम में साथ निभाने वाले अक्रूर और चर्चित विदुर दोनों ने उन्हें उनके बेटों के असाधारण जन्म की घटना का स्मरण करवाते हुए दिलासा दिया।
Akrūra and the illustrious Vidura, who shared the joys and sorrows of Queen Kuntī, both consoled her by reminding her of the extraordinary event of the birth of her sons.
तात्पर्य
अक्रूर और विदुर ने रानी कुंती को याद दिलाया कि उनके पुत्र स्वर्गीय देवताओं के अवतार थे और इसलिए सामान्य मनुष्यों की तरह पराजित नहीं किए जा सकते। वास्तव में, इस परम धार्मिक परिवार की असाधारण विजय की प्रतीक्षा थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥