श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.48.9 
सहोष्यतामिह प्रेष्ठ दिनानि कतिचिन्मया ।
रमस्व नोत्सहे त्यक्तुं सङ्गं तेऽम्बुरुहेक्षण ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
[त्रिवक्रा ने कहा]: हे प्रियतम! कृपया कुछ और दिन यहाँ मेरे साथ रहकर आनंद लो। हे कमल-नेत्र! मैं तुम्हारा साथ छोड़कर नहीं रह सकती।
 
[Trivakra said] : O beloved! Please stay here with me for a few more days and enjoy. O lotus-eyed one! I cannot leave your company.
तात्पर्य
अम्बु का अर्थ है "जल", और रुह का अर्थ है "उत्थान करना"। इस प्रकार अम्बुरुह का अर्थ है "कमल का फूल, जो जल से ऊपर उठता है"। भगवान कृष्ण को अम्बुरुहेक्षण कहते हैं, "कमल-नेत्र"। वह सभी सुंदरता का स्रोत और अवतार हैं, और स्वाभाविक रूप से त्रिवक्रा उनकी ओर आकर्षित हुई। हालाँकि, प्रभु की सुंदरता आध्यात्मिक और पवित्र है, और उनका उद्देश्य त्रिवक्रा के साथ स्वयं को संतुष्ट करना नहीं था बल्कि उन्हें शुद्ध आध्यात्मिक अस्तित्व, कृष्ण भावना के बिंदु पर लाना था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)