इस प्रकार शरीर पर लेप लगाकर ही अलभ्य भगवान को पाकर दुर्भाग्यशाली त्रिवक्रा ने स्वतंत्रता के स्वामी से निम्नलिखित प्रार्थना की।
Finding the Lord in this manner, who was unattainable by merely anointing the body, the unfortunate Trivakra made the following request to the Lord of freedom (salvation).
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, श्रीमती त्रिवक्रा ने भगवान से प्रार्थना की, "कृपया सिर्फ मेरे साथ ही विनोद कीजिए, किसी दूसरी महिला के साथ नहीं।" क्योंकि कृष्ण ऐसा वरदान देने के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए त्रिवक्रा को यहां अभाग्यवती बताया गया है। श्रीधर स्वामी कहते हैं कि भले ही सामान्य दृष्टि से वह भौतिक यौन सुख की याचना करती प्रतीत हो रही थी, लेकिन वास्तव में वह इस समय एक मुक्त आत्मा थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥