श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.48.5 
सा मज्जनालेपदुकूलभूषण-
स्रग्गन्धताम्बूलसुधासवादिभि: ।
प्रसाधितात्मोपससार माधवं
सव्रीडलीलोत्स्मितविभ्रमेक्षितै: ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
त्रिवक्रा स्नान करके, अपने शरीर पर लेप लगाकर और सुन्दर वस्त्र पहनकर तथा इसके बाद आभूषण और मालाएँ पहनकर और इत्र लगाकर और फिर पान-सुपारी खाकर और सुगन्धित पेय पीकर तैयार हुई। इसके बाद वह शर्मीली, चंचल हँसी और आकर्षक नजरों से माधव के पास पहुँची।
 
Trivakra got ready after bathing, anointing herself, dressing herself in fine clothes, then putting on ornaments and garlands, applying perfume, chewing betel nut and drinking fragrant drinks. Then she approached Madhava with a shy, playful smile and alluring glances.
तात्पर्य
इस श्लोक से यह स्पष्ट होता है कि किसी महिला के यौन सुख की तैयारी करने के तरीके हजारों सालों में नहीं बदले हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)