उद्धव को भी सम्मानपूर्ण आसन मिला। परंतु, चूँकि वे साधु सदृश पुरुष थे, इसलिए उन्होंने केवल उसे छुआ और फिर फर्श पर बैठ गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने मानव समाज के व्यवहार का अनुकरण करते हुए भव्य शय्या पर आराम से लेट गए।
Uddhava also got a seat with respect. Since he was a saintly person, he only touched it and then sat on the floor. Then Lord Krishna, following the customs of human society, lay down on the luxurious bed.
तात्पर्य
आचार्यो के अनुसार उद्धव को अपने भगवान के प्रति श्रद्धा प्रकट हुई और इस प्रकार वह उनकी उपस्थिति में एक वैभवपूर्ण आसन पर बैठने से मना कर दिया; बल्कि, उन्होंने उस आसन को अपने हाथ से छुआ और फर्श पर बैठ गए। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि भगवान कृष्ण ने त्रिवक्र के घर के भीतरी कक्षों में स्थित एक बिस्तर पर खुद को सहज कर लिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥