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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  10.48.36 
इत्यक्रूरं समादिश्य भगवान् हरिरीश्वर: ।
सङ्कर्षणोद्धवाभ्यां वै तत: स्वभवनं ययौ ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
[श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा] : इस प्रकार अक्रूर को पूर्ण रूप से निर्देश देकर, भगवान श्री हरि, संकर्षण जी और उद्धव के साथ अपने निवास स्थान पर वापस लौट आये।
 
[Śukadeva Gosvāmī continued] : Having thus fully instructed Akrūra, Lord Hari, accompanied by Saṅkarṣana and Uddhava, returned home.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत अड़तालीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)