Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.48.3: जब त्रिवक्रा ने उन्हें अपने घर की ओर आते देखा तो वह जल्दी से अपने सिंहासन से उठ खड़ी हुईं। सखियों के साथ आगे बढ़कर उन्होंने भगवान अच्युत का सम्मान किया, उन्हें उत्तम आसन और पूजा की अन्य सामग्रियाँ अर्पित कीं। | bhagavat अध्याय 10.48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृहं तमायान्तमवेक्ष्य सासनात्
सद्य: समुत्थाय हि जातसम्भ्रमा ।
यथोपसङ्गम्य सखीभिरच्युतं
सभाजयामास सदासनादिभि: ॥ ३ ॥
अनुवाद
जब त्रिवक्रा ने उन्हें अपने घर की ओर आते देखा तो वह जल्दी से अपने सिंहासन से उठ खड़ी हुईं। सखियों के साथ आगे बढ़कर उन्होंने भगवान अच्युत का सम्मान किया, उन्हें उत्तम आसन और पूजा की अन्य सामग्रियाँ अर्पित कीं।
When Trivakra saw them approaching her house, she immediately got up from her seat in a hurry. She came forward along with her friends and welcomed Lord Achyuta by offering him a beautiful seat and other articles of worship.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥