Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.48.29: भगवान ने कहा : आप हमारे गुरु, काका और प्रशंसनीय मित्र हैं, और हम आपके पुत्रों की तरह हैं; इसलिए हम हमेशा आपकी रक्षा, पालन-पोषण और दया पर निर्भर रहते हैं। | bhagavat अध्याय 10.48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीभगवानुवाच
त्वं नो गुरु: पितृव्यश्च श्लाघ्यो बन्धुश्च नित्यदा ।
वयं तु रक्ष्या: पोष्याश्च अनुकम्प्या: प्रजा हि व: ॥ २९ ॥
अनुवाद
भगवान ने कहा : आप हमारे गुरु, काका और प्रशंसनीय मित्र हैं, और हम आपके पुत्रों की तरह हैं; इसलिए हम हमेशा आपकी रक्षा, पालन-पोषण और दया पर निर्भर रहते हैं।
The Lord said: You are our teacher, uncle and praiseworthy friend, and we are like your sons; therefore, we are always dependent on your protection, care and mercy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥