श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.48.24 
स त्वं प्रभोऽद्य वसुदेवगृहेऽवतीर्ण:
स्वांशेन भारमपनेतुमिहासि भूमे: ।
अक्षौहिणीशतवधेन सुरेतरांश-
राज्ञाममुष्य च कुलस्य यशो वितन्वन् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, आप वही परम पुरुष हैं और अब आप अपने संपूर्ण भाग के साथ वसुदेव के घर प्रकट हुए हैं। आपने देवताओं के शत्रुओं के विस्तारित रूप वाले राजाओं के नेतृत्व वाली हज़ारों सेनाओं को नष्ट करके पृथ्वी के बोझ को कम किया है और साथ ही हमारे कुल की प्रसिद्धि का विस्तार किया है।
 
O Lord, You are that Supreme Person and now You have appeared in the house of Vasudeva along with Your partialities. You have done so to relieve the burden of the earth and to extend the glory of our lineage by killing thousands of armies led by kings who are partialities of the enemies of the demigods.
तात्पर्य
सूरेतरामश-राजनाम शब्द बताता है कि कृष्ण द्वारा संहारे गए राक्षसी राजा देवताओं के शत्रुओं के विस्तार या अवतार थे। इस तथ्य को महाभारत में विस्तृत रूप से समझाया गया है, जो राक्षसी राजाओं की विशिष्ट पहचान प्रकट करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)