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bhagavat 10.48.23: आपने सारे ब्राह्मांड की भलाई के लिए सबसे पहले वेदों के प्राचीन धार्मिक पथ का वर्णन किया। जब कभी भी दुष्ट लोग नास्तिकता की राह अपनाकर इस पथ को अवरुद्ध करते हैं, तो आप सद्गुण से युक्त एक नया अवतार लेते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.48.23 
त्वयोदितोऽयं जगतो हिताय
यदा यदा वेदपथ: पुराण: ।
बाध्येत पाषण्डपथैरसद्भ‍ि-
स्तदा भवान् सत्त्वगुणं बिभर्ति ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
आपने सारे ब्राह्मांड की भलाई के लिए सबसे पहले वेदों के प्राचीन धार्मिक पथ का वर्णन किया। जब कभी भी दुष्ट लोग नास्तिकता की राह अपनाकर इस पथ को अवरुद्ध करते हैं, तो आप सद्गुण से युक्त एक नया अवतार लेते हैं।
 
You initially explained the ancient religious path of the Vedas for the benefit of the entire world. Whenever this path is obstructed by evil persons adopting the path of atheism, you appear in some form or the other, endowed with the divine mode of goodness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)