श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.48.22 
देहाद्युपाधेरनिरूपितत्वाद्
भवो न साक्षान्न भिदात्मन: स्यात् ।
अतो न बन्धस्तव नैव मोक्ष:
स्यातां निकामस्त्वयि नोऽविवेक: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
चूँकि यह कभी प्रदर्शित नहीं हुआ है कि आप भौतिक शारीरिक उपाधियों से प्रच्छन्न हैं अत: यह निष्कर्ष रूप में यह समझना होगा कि शाब्दिक अर्थ में न तो आपका जन्म होता है न ही कोई द्वैत है। इसलिए आपको बन्धन या मोक्ष का सामना नहीं करना होता। और यदि आप ऐसा करते प्रतीत होते हैं, तो यह आपकी इच्छा के कारण ही है कि हम आपको इस रूप में देखते हैं या कि हममें विवेक का अभाव है इसलिए ऐसा है।
 
Since it has never been shown that You are disguised by material bodily titles, it must be concluded that You are neither born nor have any duality in the literal sense. Therefore You do not have to suffer bondage or liberation. And if You appear to do so, it is either because of Your will that we see You as such or because we lack discernment.
तात्पर्य
यहाँ अक्रूर ने दो कारण बताए हैं कि क्यों प्रभु मनुष्य की तरह भौतिक रूप में अवतरित दिखाई देते हैं। पहला, जब भगवान कृष्ण अपने लीलाएँ करते है, उनके प्रेमी भक्त उन्हें अपने प्रिय बच्चे, मित्र, प्रेमी और इसी तरह से सोचते हैं। इस प्यार भरे पारस्परिकता के आनंद में, वे कृष्ण को भगवान के रूप में नहीं सोचते हैं। उदाहरण के लिए, उनके प्रति अपने असाधारण प्रेम के कारण, माँ यशोदा चिंता करती है कि कृष्ण जंगल में घायल हो जाएँगे। वह इस तरह क्यों महसूस करती है यह प्रभु की इच्छा है, जिसे यहाँ निःकाम शब्द से दर्शाया गया है। प्रभु के भौतिक रूप में प्रकट होने का दूसरा कारण अविवेक शब्द से इंगित किया गया है: केवल अज्ञान के कारण, भेदभाव की कमी, व्यक्ति भगवद् का स्वरूप को गलत समझ सकता है। भगवतम के ग्यारहवें सर्ग में, भगवान कृष्ण के श्री उद्धव के साथ चर्चा में, प्रभु अपने पारलौकिक स्थिति के बारे में बंधन और मुक्ति से परे विस्तार से चर्चा करते हैं। जैसा कि वैदिक साहित्य में कहा गया है, देहदेही-विभागों यां नेंस्वरे विद्यते क्वचित: "परमेश्वर में शरीर और आत्मा का कभी कोई भेद नहीं होता है।" दूसरे शब्दों में, श्री कृष्ण का शरीर शाश्वत, आध्यात्मिक, सर्वज्ञ और सभी आनंद का भंडार है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)