त्रिवक्रा का घर ऐश्वर्यपूर्ण साज-सामान से भव्यता के साथ सुसज्जित था और इच्छा को उत्तेजित करने वाले सामानों से भरा हुआ था। इसमें पताकाएँ, मोतियों की मालाएँ, चंदोवा, सुंदर बिस्तर और बैठने के लिए जगह थी और सुगंधित अगरबत्ती, दीपक, फूल-मालाएँ और सुगंधित चंदन का लेप भी था।
Trivakra's house was decorated with opulent furnishings and was full of erotic accessories. There were flags, pearl strings, chandeliers, beautiful beds and seats, and also fragrant aguru, lamps, flower garlands and fragrant sandalwood paste.
तात्पर्य
श्रीधर स्वामी के अनुसार, त्रिवकरा के घर में कामुकता को बढ़ाने वाले साधन थे, जिसमें स्पष्ट यौन चित्र भी शामिल थे। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि उनके साज-सामान में हर्बल कामोत्तेजक भी शामिल थे। त्रिवकरा के इरादों को समझना मुश्किल नहीं है, फिर भी भगवान कृष्ण उसे भौतिक अस्तित्व से बचाने के लिए वहां गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥