श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.48.19 
आत्मसृष्टमिदं विश्वमन्वाविश्य स्वशक्तिभि: ।
ईयते बहुधा ब्रह्मन् श्रुतप्रत्यक्षगोचरम् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
हे परम सत्य, आप अपनी निजी शक्तियों से इस ब्रह्माण्ड की रचना करते हैं और फिर उसमें प्रवेश कर जाते हैं। इस प्रकार, कोई भी आपको विभिन्न रूपों में देख सकता है, चाहे वह महाजनों से सुनकर हो या फिर प्रत्यक्ष अनुभव करके।
 
O Supreme Truth, you create this universe with your personal powers and then enter it. In this way, by hearing from the great sages and by direct experience, man can experience you in many different forms.
तात्पर्य

श्रुति-प्रत्यक्ष-गोचरम का आत्म-सृष्टम इदं विश्व के साथ नपुंसक लिंग में व्याकरणिक सामंजस्य इस ओर संकेत करता है कि परम भगवान अपनी सृष्टि में अपनी क्षमताओं के साथ प्रवेश कर स्वयं को इस ब्रह्मांड के भीतर बोधगम्य बना लेते हैं। भगवतम और अन्य अधिकृत वैदिक साहित्य में, हम अक्सर भगवान के अन्य सभी चीज़ों पर एक साथ श्रेष्ठता और उनके साथ उनकी पहचान के विवरण पाते हैं। हम वैदिक साहित्य से श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा शक्तिशाली ढंग से प्रचारित निष्कर्ष के अलावा कोई अन्य निष्कर्ष निकाल नहीं सकते: अचिन्त्य-भेदाभेदा-तत्व। अर्थात्, परम सत्य सब चीज़ों से बड़ा है और भिन्न है (क्योंकि वह सभी का सर्वशक्तिमान निर्माता और नियंत्रक है), और एक साथ ही हर चीज़ के साथ एक है (क्योंकि जो कुछ भी मौजूद है वह उसकी अपनी शक्ति का विस्तार है)।

श्रीमद्-भागवतम के इन अध्यायों के दौरान, हम एक अद्वितीय, इस महान कार्य की असाधारण विशेषता का भी पालन करते हैं। चाहे कृष्ण गोपियों को अपना संदेश भेज रहे हों या अक्रूर की प्रार्थनाओं को स्वीकार कर रहे हों, लगातार दार्शनिक चर्चा होती है। पूरे भागवतम में, आकर्षक लीलाओं और निरंतर आध्यात्मिक दर्शन का स्थिर संयोजन एक असाधारण विशेषता है। हमें भगवान और उनके मुक्त सहयोगियों की आध्यात्मिक भावनाओं को देखने और यहाँ तक कि उनका आनंद लेने की अनुमति है, और फिर भी हमें उनकी पारम्परिक स्थिति की लगातार स्मरण कराया जाता है ताकि हम सस्ते, नररूपी दृष्टिकोण में न फँस जाएँ। इस प्रकार यह कार्य के स्वरूप के साथ पूरी तरह से मेल खाता है कि अक्रूर अपने उन्माद में, भगवान का सटीक दार्शनिक प्रार्थनाओं के साथ गौरव करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)