श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  10.48.13-14 
स तान्नरवरश्रेष्ठानाराद् वीक्ष्य स्वबान्धवान् ।
प्रत्युत्थाय प्रमुदित: परिष्वज्याभिनन्द्य च ॥ १३ ॥
ननाम कृष्णं रामं च स तैरप्यभिवादित: ।
पूजयामास विधिवत् कृतासनपरिग्रहान् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
जब अक्रूर ने अपने रिश्तेदारों और महापुरुषों को दूर से आते देखा, तो वह खुशी-खुशी उठकर खड़े हो गए। उन्हें गले लगाने और उनका स्वागत करने के बाद, अक्रूर ने कृष्ण और बलराम को प्रणाम किया और बदले में उन्होंने भी अक्रूर का अभिवादन किया। फिर, जब उनके मेहमान बैठ गए, तो उन्होंने शास्त्रों के नियमों के अनुसार उनकी पूजा की।
 
When Akrura saw his own relatives and male dignitaries approaching from a distance, he rose up joyfully. After embracing and welcoming them, Akrura greeted Krishna and Balarama and they greeted him in return. Then, when his guests had taken their seats, he worshipped them according to the classical rules.
तात्पर्य
श्रील जीव गोस्वामी बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और अन्य अक्रूर के पास एक दोस्ताना रवैया अपनाकर पहुँचे थे। पहले अक्रूर ने भी उस दोस्ताना मिजाज का जवाब दिया, और फिर, उन्हें अतिथि सत्कार दिखाने के दौरान, उन्होंने भगवान के प्रति अपना स्वाभाविक भक्ति भाव अपनाया और इस तरह श्री कृष्ण और श्री बलराम के चरणों में नतमस्तक हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)