श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती इस प्रकार टिप्पणी करते हैं: भगवान कृष्ण, सभी अवतारों में सर्वश्रेष्ठ, पवित्रता और नैतिकता के सर्वोच्च मंच पर विराजमान हैं, और इस प्रकार वह हमेशा सभी के द्वारा प्रशंसनीय रहे, यहाँ तक कि गाय चराने, जंगल में घूमने, युवा बंदरों के साथ भोजन करने, दही चुराने, अन्य पुरुषों की पत्नियों को बहलाने आदि के लिए सांसारिक आलोचना स्वीकार करने के दौरान भी। इसी तरह, गोपियाँ, जो भगवान की आनंद शक्ति से बनी हैं, उन्होंने भाग्य की देवियों की तुलना में भी पवित्रता और शुभता के उच्चतम स्तर को प्राप्त किया, और इस प्रकार गोपियाँ अत्यधिक गौरवशाली हैं, भले ही उन्हें सांसारिक लोगों द्वारा आलोचना की जाती थी क्योंकि वे केवल गाय चराने वाली महिलाएं थीं जो जंगल में रहती थीं और स्पष्ट रूप से अनुचित तरीके से व्यवहार करती थीं।
