ये प्रभु के दिव्य आनंद हैं। भगवान कृष्ण और गोपियाँ दोनों ही पूर्ण रूप से मुक्त आत्माएँ हैं, जो दिव्य प्रेमपूर्ण मामलों में लिप्त हैं। इसके विपरीत, हमारे तथाकथित प्रेमपूर्ण संबंध, आध्यात्मिक दुनिया में पूर्ण प्रेमपूर्ण संबंधों के विकृत प्रतिबिंब होने के कारण, वासना, लालच, अभिमान आदि से प्रदूषित होते हैं। सभी मुक्त आत्माओं की तरह, गोपियाँ - और निश्चित रूप से स्वयं भगवान कृष्ण - इन निम्न गुणों से हमेशा के लिए मुक्त हैं, और उनके गहन प्रेमपूर्ण संबंध विशेष रूप से निरपेक्ष भक्ति से प्रेरित हैं।
