श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 47: भ्रमर गीत  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  10.47.54 
उवास कतिचिन्मासान्गोपीनां विनुदन् शुच: ।
कृष्णलीलाकथां गायन् रमयामास गोकुलम् ॥ ५४ ॥
 
 
अनुवाद
उद्धव ने वहाँ कृष्ण की लीलाओं की कथाएँ कहकर गोपियों को उनके दुख से मुक्त किया और कई महीनों तक वहीं रहे। इस तरह उन्होंने सभी गोकुलवासियों के लिए आनंद का संचार किया।
 
Uddhava stayed there for many months, alleviating the sorrows of the gopis by narrating stories of Krishna's pastimes. In this way he brought joy to all the residents of Gokul.
तात्पर्य
इस संबंध में महान आचार्य जीव गोस्वामी टिप्पणी करते हैं कि उद्धव ने वृंदावन में अपने प्रवास के दौरान निश्चित रूप से कृष्ण के पालक माता-पिता, नंद और यशोदा को प्रसन्न करने का विशेष ध्यान रखा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)