जैसे तुरंत जागने वाला व्यक्ति स्वप्न के विषय पर विचार कर सकता है, यद्यपि यह भ्रामक होता है। इसी प्रकार मन द्वारा मनुष्य इंद्रियविषयों का ध्यान करता है, जिन्हें बाद में इंद्रियाँ प्राप्त कर सकती हैं। इसलिए मनुष्य को पूर्णतः सतर्क रहना चाहिए और मन को वश में लाना चाहिए।
Just as a person who has just woken up can keep thinking about a dream although it is an illusion, so through the mind one contemplates sense objects which the senses can later receive. Therefore one must be completely alert and bring the mind under control.
तात्पर्य
प्रतिपद् क्रियापद का अर्थ है "समझा जाना या पुनर्स्थापित होना"। आत्मा जो विनिद्र है, भौतिक चेतना की स्वप्नावस्था की स्थिति से मुक्त, प्रभु श्रीकृष्ण के एक शाश्वत सेवक के रूप में अपनी संवैधानिक स्थिति में पुनर्स्थापित होती है, और इस प्रकार आत्मा को शुद्ध चेतना द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समझा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥