सर्वात्मभावोऽधिकृतो भवतीनामधोक्षजे ।
विरहेण महाभागा महान्मेऽनुग्रह: कृत: ॥ २७ ॥
अनुवाद
हे परम भाग्यशालिनी गोपियो, तुम लोगों ने दिव्य स्वामी के लिए अनन्य प्रेम का अधिकार ठीक ही प्राप्त किया है। निस्सन्देह, कृष्ण के अलग होने पर उनके प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करके तुम लोगों ने मुझ पर महती कृपा दिखलाई है।
O most fortunate gopis, you have rightly earned the right to exclusive love for the Divine Lord. Indeed, by showing your love for Krishna in his absence, you have shown me a great kindness.
तात्पर्य
गोपियों ने न केवल उद्धव को अपितु सारे विश्व को ईश्वर प्रेम का आनंद दिखाया और इस तरह उन्होंने सभी पर अपनी कृपा बरसाई। श्रील जीव गोस्वामी के अनुसार क्योंकि उनकी प्रेममयी भक्ति एक उपयुक्त तरीके से की गयी, उनके प्रेम ने परम भगवान को उनके नियंत्रण में ला दिया। फिर भी अपने प्रेम की तीव्रता दिखाने के लिए उन्होंने उन्हें छोड़ दिया था। लेकिन अभी वह फिर से उनके बीच प्रकट हुए और उनकी तीव्र भक्ति के जरिए आपने आपको आध्यात्मिक उपस्थिति दर्ज करवाई।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)