दानव्रततपोहोम जपस्वाध्यायसंयमै: ।
श्रेयोभिर्विविधैश्चान्यै: कृष्णे भक्तिर्हि साध्यते ॥ २४ ॥
अनुवाद
श्री कृष्ण के प्रति समर्पण का भाव दान, कठिन व्रतों, तपस्याओं, अग्नि यज्ञ, जप, वैदिक ग्रंथों के अध्ययन, नियमों का पालन और, वास्तव में, कई अन्य शुभ प्रथाओं के पालन द्वारा प्राप्त किया जाता है।
Devotion to Lord Krishna is attained through charity, strict fasts, austerities, fire sacrifices, chanting, studying Vedic scriptures, following rituals and many other auspicious means.
तात्पर्य
श्रील विस्वनाथ चक्रवर्ती यहाँ वर्णित प्रक्रियाआें की व्याख्या निम्नानुसार करते हैं। दान: भगवान विष्णु एवं उनके भक्तों को दान देना। व्रत: एकादशी जैसे व्रतों का पालन करना। तप: कृष्ण के लिए इन्द्रिय तृप्ति का त्याग। होम: विष्णु को समर्पित अग्नि-यज्ञ। जप: प्रभु के पवित्र नामों का एकांत में जप। स्वाध्याय: गोपाल-तापनी उपनिषद जैसे वैदिक ग्रंथों का अध्ययन एवं पाठ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)