एक शिकारी की भाँति उन्होंने कपिराज को बाणों से निर्ममतापूर्वक बिंध डाला। क्योंकि वो एक स्त्री द्वारा जीते जा चुके थे तो उन्होंने एक दूसरी नारी को जिसे वो कामवासना से मिले थे विकृत कर दिया। इतना ही नहीं, बलि महाराज को भोगकर भी उन्होंने उन्हें रस्सियों से बाँध दिया जैसे वो कोई कौवा हो। इसलिए हमें इस श्यामवर्ण वाले लड़के से सारी मित्रता छोड़ देनी चाहिए भले ही हम उसके विषय में बातें करना बंद न कर पाएँ।
Like a hunter he mercilessly pierced the King of the Monkeys with arrows. Because he had been conquered by one woman he disfigured another woman who had come to him lustfully. Moreover, even after eating the sacrifice of Bali Maharaja he tied him up with ropes as if he were a crow. Therefore we must give up all friendship with this dark-skinned boy even if we cannot stop talking about him.
तात्पर्य
कृष्ण में, भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व, श्रील प्रभुपाद इस श्लोक का अर्थ निम्नानुसार समझाते हैं: “[श्रीमती राधारानी ने मधुमक्खी से कहा,] 'तुम गरीब दूत हो, तुम केवल एक कम बुद्धिमान नौकर हो। तुम कृष्ण के बारे में ज्यादा नहीं जानते - वह कितना कृतघ्न और कठोर हृदय वाला रहा है, न केवल इस जन्म में बल्कि उनके पिछले जन्मों में भी। हमने यह सब हमारी दादी पूर्णमासी से सुना है। उन्होंने हमें बताया है कि कृष्ण का जन्म इस जन्म से पहले एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था और उन्हें रामचंद्र के नाम से जाना जाता था। उस जन्म में, अपने मित्र के दुश्मन वाली को एक क्षत्रिय के तरीके से मारने के बजाय, उन्होंने उसे एक शिकारी की तरह मार डाला। एक शिकारी एक सुरक्षित छिपने का स्थान लेता है और फिर उस जानवर का सामना किए बिना उसे मार देता है। तो भगवान रामचंद्र को एक क्षत्रिय के रूप में, वाली से आमने-सामने लड़ना चाहिए था, लेकिन अपने दोस्त द्वारा उकसाए जाने पर, उन्होंने उसे एक पेड़ के पीछे से मार डाला। इस प्रकार उन्होंने एक क्षत्रिय के धार्मिक सिद्धांतों से विचलन किया। साथ ही, वह सीता की सुंदरता से इतना आकर्षित थे कि उन्होंने रावण की बहन शूर्पणखा की नाक और कान काटकर उसे एक बदसूरत महिला में बदल दिया। शूर्पणखा ने उनके साथ एक घनिष्ठ संबंध का प्रस्ताव रखा, और एक क्षत्रिय के रूप में उन्हें उसे संतुष्ट करना चाहिए था। लेकिन वह इतने पतिव्रत थे कि वह सीतादेवी को नहीं भूल पाए और शूर्पणखा को एक बदसूरत महिला में बदल दिया। क्षत्रिय के रूप में जन्म लेने से पहले, उन्होंने वामनदेव के नाम से जाने जाने वाले एक ब्राह्मण लड़के के रूप में जन्म लिया और बलि महाराज से दान माँगा। बलि महाराज इतने उदार थे कि उन्होंने उन्हें जो कुछ भी दिया, फिर भी कृष्ण ने वामनदेव के रूप में कृतघ्नता से उन्हें एक कौवे की तरह गिरफ्तार कर लिया और उन्हें पाताल लोक में धकेल दिया। हम कृष्ण के बारे में सब कुछ जानते हैं और वह कितना कृतघ्न है। लेकिन यहाँ कठिनाई यह है: उसके इतने क्रूर और कठोर होने के बावजूद, हमारे लिए उसके बारे में बात करना छोड़ना बहुत मुश्किल है।'” श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि राधारानी के इस भाषण को अवजल्प कहा जाता है, जैसा कि रूप गोस्वामी ने उज्ज्वल-नीलमणि (14.192) के निम्नलिखित श्लोक में वर्णित किया है: हरौ काठिन्य-कामित्व- धौर्त्यद असक्ति-योग्यता यत्र सेरस्या-भियवोक्ता सोऽवलपः सतां मतः "संतों ने निष्कर्ष निकाला है कि जब एक प्रेमी, ईर्ष्या और भय से प्रेरित होकर, यह घोषणा करता है कि उसकी कठोरता, वासना और बेईमानी के कारण भगवान हरि उसके लगाव के योग्य नहीं हैं, तो ऐसे भाषण को अवजल्प कहा जाता है।”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥