श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  10.46.42 
युवयोरेव नैवायमात्मजो भगवान् हरि: ।
सर्वेषामात्मजो ह्यात्मा पिता माता स ईश्वर: ॥ ४२ ॥
 
 
अनुवाद
निश्चय ही भगवान् हरि सिर्फ आपके बेटे नहीं हैं, बल्कि भगवान होने के कारण वे हर एक के बेटे, आत्मा, पिता और माता हैं।
 
Certainly Lord Hari is not only your son, but being the Supreme Lord He is the son, soul, father and mother of everyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)