न ह्यस्यास्ति प्रिय: कश्चिन्नाप्रियो वास्त्यमानिन: ।
नोत्तमो नाधमो वापि समानस्यासमोऽपि वा ॥ ३७ ॥
अनुवाद
उनके लिए कोई विशेष प्रिय नहीं है, कोई घृणित नहीं है, कोई श्रेष्ठ नहीं है, कोई हीन नहीं है; फिर भी वे किसी के प्रति उदासीन नहीं रहते। वे सम्मान पाने की सारी इच्छाओं से रहित हैं, फिर भी वे सबको सम्मान देते हैं।
For him no one is particularly dear or disliked; neither superior nor inferior; yet he is not indifferent to anyone. He is devoid of all desire to receive honour, yet he respects all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥