श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.46.3 
गच्छोद्धव व्रजं सौम्य पित्रोर्नौ प्रीतिमावह ।
गोपीनां मद्वियोगाधिं मत्सन्देशैर्विमोचय ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
[भगवान कृष्ण ने कहा] हे भले उद्धव, तुम व्रज जाओ और हमारे माता-पिता को सुख दो। इतना ही नहीं, मेरा सन्देश देकर उन गोपियों को भी कष्ट से मुक्त करो जो मुझसे बिछड़ने के कारण दुखी हैं।
 
[Lord Krishna said] O noble Uddhava, go to Vraja and make our parents happy. Not only this, convey my message to those Gopis who are suffering due to my separation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)