Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.46.22: जब हम उन स्थानों को—जैसे नदियाँ, पर्वत और जंगल—देखते हैं, जिन्हें मुकुंद ने अपने चरणों से सुशोभित किया और जहाँ उन्होंने क्रीड़ाएँ और लीलाएँ कीं, तो हमारे मन पूर्ण रूप से उनमें लीन हो जाते हैं। | bhagavat अध्याय 10.46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सरिच्छैलवनोद्देशान् मुकुन्दपदभूषितान् ।
आक्रीडानीक्ष्यमाणानां मनो याति तदात्मताम् ॥ २२ ॥
अनुवाद
जब हम उन स्थानों को—जैसे नदियाँ, पर्वत और जंगल—देखते हैं, जिन्हें मुकुंद ने अपने चरणों से सुशोभित किया और जहाँ उन्होंने क्रीड़ाएँ और लीलाएँ कीं, तो हमारे मन पूर्ण रूप से उनमें लीन हो जाते हैं।
When we see the places—like rivers, mountains and forests—which He adorned with His feet and where He played and played His pastimes, our minds become completely absorbed in Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥