श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.46.16 
कच्चिदङ्ग महाभाग सखा न: शूरनन्दन: ।
आस्ते कुशल्यपत्याद्यैर्युक्तो मुक्त: सुहृद्‍व्रत: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
[नन्द महाराज ने कहा] : हे भाग्यशाली, अब शूर का बेटा सुरक्षित है और वह अपने बच्चों और अन्य रिश्तेदारों के साथ फिर से मिल गया है?
 
[Nanda Maharaja said]: O most fortunate one, is the son of Sura now well, having been freed and reunited with his children and other relatives?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)