Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.45.49: इस प्रकार अपने गुरु से विदा होने की अनुमति पाकर, दोनों भाइयों ने अपने रथ पर बैठकर अपनी नगरी की ओर प्रस्थान किया। उनका रथ वायु की तरह तेज गति से चल रहा था और बादलों की तरह गर्जना कर रहा था। | bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार अपने गुरु से विदा होने की अनुमति पाकर, दोनों भाइयों ने अपने रथ पर बैठकर अपनी नगरी की ओर प्रस्थान किया। उनका रथ वायु की तरह तेज गति से चल रहा था और बादलों की तरह गर्जना कर रहा था।
Having thus obtained the permission of their Guru to depart, the two brothers returned to their city on their chariot. This chariot was moving as fast as the wind and was resounding like a cloud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥