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bhagavat 10.45.26: हे राजन्, तब शूरसेन के पुत्र वसुदेव ने अपने दोनों पुत्रों का दूसरा जन्म (उपनयन संस्कार) करवाने के लिए एक पुरोहित और कुछ ब्राह्मणों की व्यवस्था की।   |   bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.45.26 
अथ शूरसुतो राजन् पुत्रयो: समकारयत् ।
पुरोधसा ब्राह्मणैश्च यथावद् द्विजसंस्कृतिम् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, तब शूरसेन के पुत्र वसुदेव ने अपने दोनों पुत्रों का दूसरा जन्म (उपनयन संस्कार) करवाने के लिए एक पुरोहित और कुछ ब्राह्मणों की व्यवस्था की।
 
O King, then Vasudeva, son of Shurasena, arranged for a priest and other Brahmins to perform the Dwija ceremony for his two sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)