यात यूयं व्रजं तात वयं च स्नेहदु:खितान् ।
ज्ञातीन् वो द्रष्टुमेष्यामो विधाय सुहृदां सुखम् ॥ २३ ॥
अनुवाद
हे पिताजी, अब आप सब व्रज लौट जाएं। जब हम अपने मित्रों को सुख प्रदान कर देंगे तब हम जल्दी ही आप लोगों और अपने उन रिश्तेदारों से मिलने आएँगे जो हमारे वियोग में दुःखी हैं।
O father, now you all may return to Vraja. After we have given some happiness to your well-wishing friends, we will immediately come to see you and our dear relatives who are saddened by our separation.
तात्पर्य
भगवान यहां मथुरा में अपने प्यारे भक्तों को प्रसन्न करने की इच्छा रखते हैं जैसे वसुदेव, देवकी और यादव वंश के अन्य सदस्य जो व्रंदावन में रहने के दौरान इतने लंबे समय से उनसे अलग थे|
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥